चांदी पर छाई महंगाई ने कच्चे तेल को भी पीछे छोड़ दिया, ऐसा 40 साल बाद हुआ है

बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये एक दुर्लभ ऐतिहासिक घटना है. चांदी अब WTI (कच्चे तेल की किस्म) कच्चे तेल के एक बैरल से भी महंगी हो गई है. WTI क्रूड ऑयल का भाव 56 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे पहले करीब 40 साल पहले चांदी का भाव कच्चे तेल से आगे निकल गया था. वहीं, विदेशों में जारी तेजी के चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेज (MCX) में भी चांदी नई ऊंचाई पर पहुंच गई. दि हिंदू बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक 17 दिसंबर को एमसीएक्स पर चांदी का भाव 8179 रुपये 2 लाख 5 हजार 934 रुपये रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. इसके अलावा भी कई कारण हैं जिसकी वजह से चांदी में उछाल देखने को मिल रहा है. इसकी औद्योगिक मांग बढ़ी है. खासतौर से सोलर एनर्जी , पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी तकनीकों में चांदी का इस्तेमाल बढ़ा है. बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने कहा कि चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि ईवी, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों और मोबाइल फोन जैसे आधुनिक उभरते उद्योगों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है.क्या चांदी खरीदने का यह सही समय है? चांदी में आई विस्फोटक तेजी के बाद निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस समय बाजार में प्रवेश करना सही रहेगा. जानकारों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है. पीएल वेल्थ में प्रोडक्ट हेड राजकुमार सुब्रमण्यम ने लाइव मिंट से कहा,“चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. लेकिन कमोडिटी अपसाइकल के दौरान इसमें कहीं ज्यादा तेजी की संभावना भी होती है, जिसकी वजह बढ़ती औद्योगिक मांग और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है.” सुब्रमण्यम ने यह भी बताया कि भारत में चांदी की मांग अब तेजी से सोलर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ रही है. ऐसे में अगर आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में 3 से 5 परसेंट की गिरावट आती है, तो ट्रेडर्स को ‘बाय ऑन डिप्स’ यानी गिरावट पर खरीदारी करनी चाहिए. वहीं, बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि मौजूदा स्तर से भले ही कुछ प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिल सकती है, लेकिन चांदी की कीमतें आगे भी मजबूत बनी रहने की संभावना है.”
भाविश अग्रवाल ने ओला इलेक्ट्रिक के 260 करोड़ के शेयर बेचे, मालूम है क्यों?

बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि ये एक दुर्लभ ऐतिहासिक घटना है. चांदी अब WTI (कच्चे तेल की किस्म) कच्चे तेल के एक बैरल से भी महंगी हो गई है. WTI क्रूड ऑयल का भाव 56 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है. रिपोर्ट में बताया गया है कि इससे पहले करीब 40 साल पहले चांदी का भाव कच्चे तेल से आगे निकल गया था. वहीं, विदेशों में जारी तेजी के चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेज (MCX) में भी चांदी नई ऊंचाई पर पहुंच गई. दि हिंदू बिजनेसलाइन की एक रिपोर्ट के मुताबिक 17 दिसंबर को एमसीएक्स पर चांदी का भाव 8179 रुपये 2 लाख 5 हजार 934 रुपये रुपये प्रति किलोग्राम के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई. इसके अलावा भी कई कारण हैं जिसकी वजह से चांदी में उछाल देखने को मिल रहा है. इसकी औद्योगिक मांग बढ़ी है. खासतौर से सोलर एनर्जी , पावर ग्रिड इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़ी तकनीकों में चांदी का इस्तेमाल बढ़ा है. बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार ने कहा कि चांदी की औद्योगिक मांग बढ़ रही है. उन्होंने कहा कि ईवी, सौर ऊर्जा, इलेक्ट्रॉनिक डिवाइसों और मोबाइल फोन जैसे आधुनिक उभरते उद्योगों में चांदी का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल हो रहा है.क्या चांदी खरीदने का यह सही समय है? चांदी में आई विस्फोटक तेजी के बाद निवेशकों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या इस समय बाजार में प्रवेश करना सही रहेगा. जानकारों की राय इस मुद्दे पर बंटी हुई है. पीएल वेल्थ में प्रोडक्ट हेड राजकुमार सुब्रमण्यम ने लाइव मिंट से कहा,“चांदी में सोने की तुलना में ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिल रहा है. लेकिन कमोडिटी अपसाइकल के दौरान इसमें कहीं ज्यादा तेजी की संभावना भी होती है, जिसकी वजह बढ़ती औद्योगिक मांग और रिटेल निवेशकों की बढ़ती भागीदारी है.” सुब्रमण्यम ने यह भी बताया कि भारत में चांदी की मांग अब तेजी से सोलर मैन्युफैक्चरिंग, इलेक्ट्रिक व्हीकल्स, इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में बढ़ रही है. ऐसे में अगर आने वाले दिनों में चांदी की कीमतों में 3 से 5 परसेंट की गिरावट आती है, तो ट्रेडर्स को ‘बाय ऑन डिप्स’ यानी गिरावट पर खरीदारी करनी चाहिए. वहीं, बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट में जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वी के विजयकुमार का कहना है कि मौजूदा स्तर से भले ही कुछ प्रॉफिट बुकिंग देखने को मिल सकती है, लेकिन चांदी की कीमतें आगे भी मजबूत बनी रहने की संभावना है.”
‘शार्क टैंक’ वाले अमन गुप्ता की BoAt कंपनी के बही-खातों में गड़बड़ी का दावा, IPO फंस जाएगा?

आईपीओ यानी इनीशियल पब्लिक ऑफर लाने की तैयारी में लगी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनी बोट (BoAt) को झटका लग सकता है. कंपनी ने जो कागज पत्तर बैंकों के साथ साझा किये हैं उनकी जानकारी कथित तौर पर कंपनी के इंटर्नल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी के सौंपे गए आईपीओ दस्तावेजों (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) में कंपनी ऑडिटर्स ने कई ऐसे मामलों का जिक्र किया है, जहां उधार देने वाले बैंकों को भेजी गई तिमाही रिपोर्ट और कंपनी के बही-खातों में अंतर पाया गया. BoAt की पैरेंट कंपनी का नाम इमैजिन मार्केटिंग (Imagine Marketing) है. इसने खुलासा किया है कि पिछले कई सालों में ऑडिटर्स ने कई ऐसी टिप्पणियां और आपत्तियां दर्ज की थीं जो कंपनी के पक्ष में नहीं हैं. ये सभी कथित गड़बड़ियां वित्त वर्ष 2023, 2024 और 2025 से संबंधित थीं. ऑडिटर्स ने चिंता जताई कि कंपनी ने कई बार उधार के पैसे का इस्तेमाल उन कामों में किया, जिसके लिए वे मंजूर नहीं किए गए थे. आईपीओ यानी इनीशियल पब्लिक ऑफर लाने की तैयारी में लगी कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स बनाने वाली कंपनी बोट (BoAt) को झटका लग सकता है. कंपनी ने जो कागज पत्तर बैंकों के साथ साझा किये हैं उनकी जानकारी कथित तौर पर कंपनी के इंटर्नल रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती है. बिजनेस टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक सेबी के सौंपे गए आईपीओ दस्तावेजों (ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस) में कंपनी ऑडिटर्स ने कई ऐसे मामलों का जिक्र किया है, जहां उधार देने वाले बैंकों को भेजी गई तिमाही रिपोर्ट और कंपनी के बही-खातों में अंतर पाया गया. BoAt की पैरेंट कंपनी का नाम इमैजिन मार्केटिंग (Imagine Marketing) है. इसने खुलासा किया है कि पिछले कई सालों में ऑडिटर्स ने कई ऐसी टिप्पणियां और आपत्तियां दर्ज की थीं जो कंपनी के पक्ष में नहीं हैं. ये सभी कथित गड़बड़ियां वित्त वर्ष 2023, 2024 और 2025 से संबंधित थीं. ऑडिटर्स ने चिंता जताई कि कंपनी ने कई बार उधार के पैसे का इस्तेमाल उन कामों में किया, जिसके लिए वे मंजूर नहीं किए गए थे.
io से फ्लिपकार्ट तक ढाई लाख करोड़ जुटाने जा रही हैं 200 कंपनियां, इतने IPO पहली बार लांच लांच होंगे

अगर आप इस साल इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में निवेश करने से चूक गए हैं . आपने लिस्टिंग वाला फायदा नहीं कमाया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. साल 2026 में आईपीओ की भरमार होने वाली है . इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में ये पहला मौका होगा जब किसी एक साल में इतने आईपीओ लॉन्च होंगे. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले साल करीब 2 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ पाइपलाइन में हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की इस रिपोर्ट में प्राइम डेटाबेस के हवाले से जानकारी दी गई है कि शेयर बाजार रेगुलेटर सेबी ने 84 कंपनियों को आईपीओ लाने की मंजूरी दे दी है. ये सभी कंपनियां मार्केट से 1.14 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं. इन 84 कंपनियों के अलावा 108 कंपनियां और हैं जो अपने आईपीओ को लाने के लिए सेबी की मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा में हैं. इस तरह से देखें तो 190 से ज्यादा कंपनियां साल 2026 में अपना आईपीओ लाने की तैयारी में हैं. ये सभी कंपनियां आईपीओ के जरिये 2.5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बाजार से पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही हैं. साल 2024 में कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 1.59 लाख करोड़ रुपये जुटाए. इसी तरह से इस साल (साल 2025) में 12 दिसंबर तक, कंपनियों ने आईपीओ के जरिये लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए . अगर आप इस साल इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में निवेश करने से चूक गए हैं . आपने लिस्टिंग वाला फायदा नहीं कमाया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. साल 2026 में आईपीओ की भरमार होने वाली है . इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में ये पहला मौका होगा जब किसी एक साल में इतने आईपीओ लॉन्च होंगे. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले साल करीब 2 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ पाइपलाइन में हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की इस रिपोर्ट में प्राइम डेटाबेस के हवाले से जानकारी दी गई है कि शेयर बाजार रेगुलेटर सेबी ने 84 कंपनियों को आईपीओ लाने की मंजूरी दे दी है. ये सभी कंपनियां मार्केट से 1.14 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं. इन 84 कंपनियों के अलावा 108 कंपनियां और हैं जो अपने आईपीओ को लाने के लिए सेबी की मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा में हैं. इस तरह से देखें तो 190 से ज्यादा कंपनियां साल 2026 में अपना आईपीओ लाने की तैयारी में हैं. ये सभी कंपनियां आईपीओ के जरिये 2.5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बाजार से पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही हैं. साल 2024 में कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 1.59 लाख करोड़ रुपये जुटाए. इसी तरह से इस साल (साल 2025) में 12 दिसंबर तक, कंपनियों ने आईपीओ के जरिये लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए .
सोने से ज्यादा उछल रही चांदी, कीमत दो लाख के पार, आगे भी बढ़ेगी या धड़ाम होगी?

अगर आप इस साल इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में निवेश करने से चूक गए हैं . आपने लिस्टिंग वाला फायदा नहीं कमाया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. साल 2026 में आईपीओ की भरमार होने वाली है . इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में ये पहला मौका होगा जब किसी एक साल में इतने आईपीओ लॉन्च होंगे. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले साल करीब 2 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ पाइपलाइन में हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की इस रिपोर्ट में प्राइम डेटाबेस के हवाले से जानकारी दी गई है कि शेयर बाजार रेगुलेटर सेबी ने 84 कंपनियों को आईपीओ लाने की मंजूरी दे दी है. ये सभी कंपनियां मार्केट से 1.14 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं. इन 84 कंपनियों के अलावा 108 कंपनियां और हैं जो अपने आईपीओ को लाने के लिए सेबी की मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा में हैं. इस तरह से देखें तो 190 से ज्यादा कंपनियां साल 2026 में अपना आईपीओ लाने की तैयारी में हैं. ये सभी कंपनियां आईपीओ के जरिये 2.5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बाजार से पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही हैं. साल 2024 में कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 1.59 लाख करोड़ रुपये जुटाए. इसी तरह से इस साल (साल 2025) में 12 दिसंबर तक, कंपनियों ने आईपीओ के जरिये लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए . अगर आप इस साल इनिशियल पब्लिक ऑफर (IPO) में निवेश करने से चूक गए हैं . आपने लिस्टिंग वाला फायदा नहीं कमाया है तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. साल 2026 में आईपीओ की भरमार होने वाली है . इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट बताती है कि भारत में ये पहला मौका होगा जब किसी एक साल में इतने आईपीओ लॉन्च होंगे. इस रिपोर्ट में बताया गया है कि अगले साल करीब 2 लाख करोड़ रुपये के आईपीओ पाइपलाइन में हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की इस रिपोर्ट में प्राइम डेटाबेस के हवाले से जानकारी दी गई है कि शेयर बाजार रेगुलेटर सेबी ने 84 कंपनियों को आईपीओ लाने की मंजूरी दे दी है. ये सभी कंपनियां मार्केट से 1.14 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना बना रही हैं. इन 84 कंपनियों के अलावा 108 कंपनियां और हैं जो अपने आईपीओ को लाने के लिए सेबी की मंजूरी मिलने की प्रतीक्षा में हैं. इस तरह से देखें तो 190 से ज्यादा कंपनियां साल 2026 में अपना आईपीओ लाने की तैयारी में हैं. ये सभी कंपनियां आईपीओ के जरिये 2.5 लाख करोड़ रुपये से भी ज्यादा बाजार से पूंजी जुटाने की तैयारी कर रही हैं. साल 2024 में कंपनियों ने आईपीओ के जरिये 1.59 लाख करोड़ रुपये जुटाए. इसी तरह से इस साल (साल 2025) में 12 दिसंबर तक, कंपनियों ने आईपीओ के जरिये लगभग 1.8 लाख करोड़ रुपये जुटाए .